2014

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हमारे सौरमंडल से बाहर के ग्रहों को खोजने में जुटे नासा (NASA) के केपलर अन्तरिक्ष यान (Kepler Spacecraft) को क़रीब डेढ़ साल बाद एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। केपलर ने हमारी पृथ्वी से 180 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक नया ग्रह खोज निकाला है। जिसका नाम HIP 116454b रखा गया है। इस ग्रह का व्यास 20 हज़ार मील है। जो कि हमारी पृथ्वी से करीब ढाई गुना ज्यादा है। साथ ही साथ यह आकार में हमारी पृथ्वी से 12 गुना ज्यादा बड़ा है। इसी वजह से इस ग्रह को "सुपर अर्थ" की श्रेणी में रखा गया है।

"सुपर अर्थ" के बारे में और जानने के लिए नासा के "साइंस न्यूज़" वेबसाइट पर विजिट करें :- http://science.nasa.gov/science-news/science-at-nasa/2014/19dec_k2/ 


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एंबेडेड छवि की स्थायी लिंकमंगल ग्रह (Mars Planet) पर जीवन की संभावनाओं को तलाशने के लिए अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की ओर से भेजे गए अन्तरिक्ष यान मार्स क्यूरियोसिटी रोवर (Mars Curiosity Rover) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। उसे पहली बार लाल ग्रह पर ऐसे कार्बनिक अणु मिले हैं, जिनका उपयोग जीवित प्रजातियों के भवन निर्माण के लिए किया जाता है। इससे मंगल पर जीवन होने की संभावनाओं को बल मिला है। रोवर द्वारा लिए नमूनों की जाँच करने वाली टीम (सैम) ने यान के उतरने वाले स्थान गेल क्रेटर पर खुदाई की। इस स्थान से कार्बनिक अणुओं में कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के कण से बने अणु पाए गए हैं, जिसे पेरकोलटेस (Percolates) कहते हैं। पेरकोलटेस एक क्लोरिन अणु है, जो चार ऑक्सीजन अणुओं के मेल से बनता है। इससे लाल ग्रह पर जीवन होने की उम्मीद जगी है।

मंगल ग्रह पर मिली मीथेन गैस
मंगल ग्रह पर मीथेन गैस के भी बुलबुले मिले हैं। इससे लाल ग्रह पर जीवन की संभावना को बल मिलता है। नासा की ओर से भेजे गए मार्स क्यूरियोसिटी रोवर ने यह खोज की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक धरती पर मीथेन गैस का बड़ा हिस्सा जीवित प्राणियों द्वारा उत्पन्न किया जाता है। वहीँ कई अन्य गैर जैविक प्रक्रियाओं से भी मीथेन गैस बनती है, लेकिन मंगल ग्रह पर अब तक ऐसी किसी प्रक्रिया की जानकारी नहीं मिली है।


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अब उत्तर प्रदेश के लोगों को आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र तथा खतौनी जैसी सेवाओं के लिए तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने घर बैठे हुए इंटरनेट के जरिए इन सेवाओं की व्यवस्था शुरू कर दी है। अब इन सेवाओं के लिए जनसेवा केन्द्र व ई - डिस्ट्रिक्ट केन्द्रों का भी चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। जनसेवा केन्द्र, लोकवाणी, ई - डिस्ट्रिक्ट व ई - सुविधा केन्द्रों से तय समय में मिलने वाले प्रमाणपत्र अब इंटरनेट के जरिए आप, कही से भी प्राप्त कर सकते हैं। नई प्रणाली में प्रमाणपत्र जारी होते ही इसकी सूचना आवेदक के मोबाइल नंबर पर पहुँच जाएगी। 

उत्तर प्रदेश में जनसेवा तथा अन्य केन्द्रों के माध्यम से आवेदक 8 विभागों की 26 सेवाएं तय समय में प्राप्त कर सकते हैं। इसमें आय - जाति - निवास प्रमाणपत्र व खतौनी समेत अन्य सेवाएं शामिल हैं। इसके लिए आवेदक को ऑनलाइन आवेदन के लिए बनाये गए पोर्टल www.uponline.up.nic.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। उसे उसी समय अपने मोबाइल नंबर पर वन टाइम पासवर्ड (OTP) मिल जाएगा। इसके बाद पोर्टल के लिंकों पर जाकर सेवाओं व शुल्क आदि की जानकारी प्राप्त कर सकते है।         

आवेदकों के लिए सिटीजन सेंट्रिक सेवाएं सीधे इंटरनेट से प्राप्त करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है। आवेदकों को क्या करना है, इसकी जानकारी पोर्टल पर स्टेप बाई स्टेप दी गई है। आवेदकों के लिए खतौनी 15 रूपये व अन्य शासकीय सेवाओं के लिए 10 रूपये शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा।


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लोकप्रिय मोबाइल मैसेजिंग सर्विस व्हाट्स ऐप (WhatsApp) ने अपने उपयोगकर्ताओं के लिए एक नया फीचर लांच किया है। डबल ब्ल्यू टिक (Double Blue Tick) नामक वाले इस फीचर के जरिए व्हाट्स ऐप इस्तेमाल करने वालों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके द्वारा भेजे गए टेक्स्ट मैसेज की डिलीवरी कब हुई और उस व्यक्ति ने इसे कब पढ़ा। इस तरह से उपयोगकर्ता इस नये फीचर के जरिए मैसेज डिलीवरी और उसे पढ़े जाने का समय जान सकेंगे। 
व्हाट्स ऐप के जरिए मैसेज भेजने वाले को यह डबल ब्ल्यू टिक (Double Blue Tick) तब दिखाई देते हैं, जब प्राप्तकर्ता मैसेज को प्राप्त करता है और इसे पढ़ लेता है।

इसी तरह एक ग्रे टिक (Grey Tick) का मतलब होता है कि मैसेज भेज दिया गया है। डबल ग्रे टिक (Double Grey Tick) का मतलब होता है कि मैसेज डिलिवर हो गया है और सिंगल ब्ल्यू टिक (Single Blue Tick) 
का मतलब हुआ कि मैसेज को प्राप्तकर्ता द्वारा पढ़ लिया गया है। व्हाट्स ऐप पर मैसेज भेजे जाने का ठीक - ठाक समय जानने के लिए यूजर को अपने पोस्ट पर क्लिक करके उसे होल्ड (Hold) करने से मैसेज भेजे जाने की जानकारी मिल भी जाती है।


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अगर आप हिन्दी ब्लॉगर है और अपने चिट्ठे (ब्लॉग) से कमाई करना चाहते हैं तो आपके लिए गूगल एडसेंस Google AdSense बहुत ही बढ़िया ख़ुशखबरी लाया है। दरअसल गूगल एडसेंस (Google AdSense)ने दिसम्बर 2014 से अपने विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए समर्थित भाषाओं (Supporting Languages) में हिन्दी (Hindi) भाषा को भी शामिल कर दिया है। यानि इसका मतलब अब ये हुआ कि आप अब अपने हिन्दी चिट्ठे से भी कमाई कर सकते हैं। 

करीब 5 महीने पहले ही मैंने इसी चिट्ठे (प्रचार) पर आपको बताया था कि हिन्दी चिट्ठाकारों (ब्लॉगरों) के लिए आ रहा है गूगल एडसेंस Google Adsense

हिन्दी ब्लॉगजगत के लिए ये एक बहुत बड़ी सफलता भी है। आखिरकार गूगल ने भी नेट पर हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए तथा कई वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगरों के अथक प्रयास और परिश्रम से प्रभावित होकर गूगल एडसेंस के विज्ञापन हिन्दी ब्लॉग्स के लिए शुरू कर दिये है।

वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगर श्री रवि रतलामी जी तथा श्री प्रवीण त्रिवेदी जी (प्राइमरी का मास्टर) ने भी इस बारे में लिखा है। 



  
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डॉ. जाकिर अली 'रजनीश' को सम्मानित करते हुए डॉ. मुरली मनोहर जोशी
चित्र साभार :- डॉ. जाकिर अली 'रजनीश' जी की फेसबुक वॉल से
बाल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध ब्लॉगर और बाल साहित्यकार डॉ. जाकिर अली 'रजनीश' जी को प्रथम हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने शुक्रवार (21 नवम्बर, 2014) शाम को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में डॉ. जाकिर अली 'रजनीश' को 75,000 रुपये नकद, शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। साइंटिफिक वर्ल्ड तथा मेरी दुनिया मेरे सपने जैसे प्रसिद्ध हिन्दी ब्लॉगों के संचालक डॉ. जाकिर अली 'रजनीश' जी ये सम्मान प्राप्त करने वाले पहले हिन्दी ब्लॉगर बन गए है।
यह सम्मान हिन्दी बाल साहित्य के मशहूर लेखक डॉ. हरिकृष्ण देवसरे के नाम पर स्थापित प्रतिष्ठान ने शुरू किया है।  


एक नज़र - कुछ अलग 


अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अगले साल  भारत के गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। यह पहला मौका होगा जब भारत के गणतंत्र दिवस समारोह पर अमेरिका का कोई राष्ट्रपति उपस्थित होगा।


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भारतीय बल्लेबाज़ रोहित शर्मा ने गुरुवार (13 नवम्बर, 2014) को कोलकाता के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान ईडन गार्डन में श्रीलंका के खिलाफ वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट मैच में 173 गेंदे खेलते हुए 264 रन बनाए। जो वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा खेली गई सबसे बड़ी पारी है।

भारत ने ईडन गार्डन के ऐतिहासिक मैदान पर टॉस जीतते हुए पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया। भारत ने रोहित शर्मा के रिकॉर्ड 264 रन, कप्तान विराट कोहली के 66 रन तथा अजिंक्य रहाणे के 28 रन की बदौलत भारत ने 5 विकेट पर 404 रन का विशाल स्कोर बनाया। श्रीलंका के लिए कप्तान मैथ्यूज ने सर्वाधिक 2 विकेट लिए।  

जवाब में पूरी श्रीलंकाई टीम 405 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 43. 1 ओवरों में 251 पर सिमट गई। श्रीलंका की तरफ से श्रीलंकाई कप्तान मैथ्यूज 75, थिरिमाने 59 रन और दिलशान 34 रन ही बना सके। भारत के धवल कुलकर्णी ने 10 ओवर में 34 रन देकर सर्वाधिक 4 विकेट चटकाए।       

मैच के बाद जब रोहित शर्मा से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह थके हुए हैं ? तो उनका जवाब था कि - 'चोट के कारण अभी-अभी मैं ब्रेक से लौटा हूँ इसलिए कोई थकान नहीं हुई। मैं अभी और 50 ओवर खेल सकता था।'

रोहित शर्मा ने आगे कहा - 'अब मैं 300 रन बनाने का प्रयास करूँगा, लेकिन अभी 264 रन का आनंद लूँगा।'


रोहित शर्मा के 264 रनों की पारी से जुड़े वर्ल्ड रिकॉर्ड 
* 173 गेंदों का सामना करते हुए 33 चौके और 9 छक्कों की मदद से 152.60 के स्ट्राइक रेट से 264 रन की वर्ल्ड रिकॉर्ड पारी खेली रोहित शर्मा ने। 

रोहित शर्मा ने वीरेन्द्र सहवाग के वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में एक पारी में सर्वाधिक रन का रिकॉर्ड 219 रन (वेस्टइंडीज के विरुद्ध) को तोड़ दिया।  

रोहित शर्मा ने अपनी 264 रन की वर्ल्ड रिकॉर्ड पारी में 186 रन केवल चौके और छक्के से बनाए। 

रोहित शर्मा ने 50 रन 72 गेंद में, 100 रन 100 गेंद में, 150 रन 125 गेंद में, 200 रन 151 गेंद में पूरे किए। 

* रोहित शर्मा वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में 250 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बन गए। 

* रोहित शर्मा 264 रन की इस पारी के साथ ही वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों में दो दोहरे शतक बनाने वाले विश्व के पहले क्रिकेटर बन गए है। 

* इस मैच में श्रीलंका की पूरी क्रिकेट टीम 251 रन पर ऑल आउट हो गई, जो रोहित शर्मा के अकेले हाईएस्ट स्कोर 264 रन से 13 रन कम थे। 

* 202 रन की साझेदारी रोहित शर्मा ने विराट कोहली के साथ तीसरे विकेट के 155 गेंदों में निभाई। 

* भारत की पारी के अंतिम 10 ओवरों में रोहित शर्मा और रॉबिन उथप्पा ने 128 रन की साझेदारी 5वें विकेट के लिए की जिसमें रोहित के 109 रन और रॉबिन उथप्पा के मात्र 16 रन थे। 

* एक पारी में सर्वाधिक 16 छक्के लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी रोहित शर्मा के नाम है। जिसे उन्होंने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अपने पहले दोहरे शतक (209) के दौरान लगाए थे।    


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कैथोलिक ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने कहा है कि - 'विकास का सिद्धान्त और बिग बैंग थ्योरी गलत नहीं है और ईश्वर ने किसी की जादू की छड़ी से दुनिया का सृजन नहीं किया।'

पोप फ्रांसिस ने कहा कि - 'ब्रह्मांड की उत्पति की वैज्ञानिक कल्पना "बिग बैंग थ्योरी" परालौकिक शक्ति के अस्तित्व से इनकार नहीं करती, बल्कि इस बात की पुष्टि करती है कि दुनिया की उत्पति ब्रह्मांड में हुए किसी उथल - पुथल का परिणाम नहीं है, बल्कि उस सर्वोच्च शक्ति द्वारा सृजित है, जिसने प्रेम की रचना की है।'

पोप फ्रांसिस ने सोमवार (27 अक्टूबर, 2014) को वेटिकन सिटी के पोटिंफिकल एकेडमी ऑफ़ साइंस में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्वाधिकारी पोप बेनेडिक्ट सोलहवें की कांस्य प्रतिमा के अनावरण के दौरान ये बातें कही थीं।


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फल और सब्जियों का भरपूर सेवन आपको खुश रहने में काफी मददगार हो सकता है। ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ क्वीन्सलैंड (UQ) ने 12,000 से ज्यादा लोगों का अध्ययन किया और पाया कि प्रतिदिन फल और सब्जियां प्रचुर मात्रा में खाने से व्यक्ति स्वस्थ एवं खुशहाल रहता है। शोधकर्ता रेडजो मुजकिक ने बताया कि, 'फल एवं सब्जियों के उपभोग से मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर होता है. आप जितना ज्यादा फल और सब्जियां खातें हैं, स्वास्थ्य को उतना अधिक फायदा पहुँचता है। प्रतिदिन पांच तरह के फल और पांच तरह की सब्जियों का सेवन आपको मानसिक ख़ुशी प्रदान करता है।'    

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कैप्टन अब्बास अली 

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के करीबी रहे तथा आजाद हिन्द फौज के कैप्टन अब्बास अली का शनिवार (11 अक्टूबर, 2014) सुबह निधन हो गया। कैप्टन अब्बास अली का जन्म 3 जनवरी, सन् 1920 ई. को हुआ था। कैप्टन अब्बास अली 94 वर्ष के थे। शनिवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत पर जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान ही कैप्टन अब्बास अली का इन्तकाल हो गया। मूल रूप से बुलंदशहर के गाँव कलंदरगढ़ी के रहने वाले कैप्टन अली ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी।

सन् 1931 ई. में पहली बार कैप्टन अब्बास अली ने अंग्रेजों को ललकारा था। उस वक़्त शहीद-ए-आजम भगत सिंह को अंग्रेज़ सरकार ने फांसी दी थी। जिसके विरोध में कैप्टन अब्बास अली ने खुर्जा की सड़कों पर अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन किया था। सन् 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरु होने के बाद उन्होंने इंडियन ब्रिटिश आर्मी 
ज्वाइन की थी। सन् 1943 ई. में ब्रिटिश फौज से बगावत करके कैप्टन अब्बास अली आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए थे। इसके लिए ब्रिटिश हुकूमत ने उनका कोर्ट मार्शल करते हुए उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन सन् 1946 ई. में नेहरू - माउंटबेटन समझौता होने के बाद वह मुल्तान के किले की कैद से रिहा हो गए। 

कैप्टन अब्बास अली ने आचार्य नरेन्द्र देव, जय प्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के सम्पर्क में आकर सोशलिस्ट मूवमेंट में भूमिका निभाई। सन् 1966 ई. में वह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव बने। बाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी शामिल किये गए। सन् 1975 ई. में आपातकाल के दौरान वह एक बार फिर जेल गए।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तथा आज़ाद हिन्द फौज के सिपाहियों की उपेक्षा से कैप्टन अब्बास अली ताउम्र दुखी रहे। वो कहते थे कि - 'आजादी के बाद जब आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों को भारतीय फौज में शामिल करने की बात आई तो उस समय की कांग्रेस सरकार ने यह कहा कि यह फौज भारतीय सेना में शामिल नहीं हो सकती है, इनके शामिल होने से सेना का अनुशासन प्रभावित होगा।'

'इसी तरह आजादी के कई दशकों तक हमें स्वतन्त्रता सेनानी का दर्जा ही नहीं दिया गया, हमें स्वतन्त्रता सेनानी नहीं माना गया। बाद में हमें सन् 1972 ई.  में स्वतन्त्रता सेनानी का दर्जा दिया गया।'

कैप्टन अब्बास अली जीवन भर यही दावा करते रहे की नेताजी की मृत्यु फारमोसा के प्लेन क्रैश में नहीं हुई थी। नेताजी जी की मृत्यु के बारे में क्या कहते थे कैप्टन अब्बास अली :-

'यह कहा जाता है कि अगस्त 1945 में नेताजी की मृत्यु फारमोसा प्लेन क्रैश में हो गई थी। यह सब तो जानबूझकर कही गई बाते हैं। मैं यह बात कैसे मान लूँ जबकि इस घटना के एक हफ्ते बाद सितम्बर 1945 के पहले हफ्ते में सिंगापूर के मेस में उन्हें मैंने अपनी आँखों से देखा है। मैंने उनके साथ खाना खाया और उनका जोशीला भाषण सुना। मेरी इन आँखों ने नेताजी को बोलते हुए, अपने साथ हाथ मिलाते देखा। मैं उनकी मौत की बात पर कैसे यकीन कर लूँ ? नेताजी का राज तो रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) की फाइलों में है।'

इसके अलावा कैप्टन कहते थे - 'आजादी के बाद क्या हमारी (आजाद हिन्द फौजियों की) मुश्किलें कम हो गई ? हमारे साथ उस समय की कांग्रेस सरकार ने भेदभाव किया। सरकार से उपेक्षा मिलना हमारे लिए कोई नयी नहीं है। मैं जब मुल्तान के किले में कैद था और मुझे फांसी की सजा सुनाई गई तो अंग्रेज़ अफसर ने मुझसे पूछा कि "कैप्टन अंग्रेज़ हुकूमत से बगावत करने का अंजाम जानते हो ?'

मैंने कहा - 'हाँ जानता हूँ, मौत और यह भी जानता हूँ कि अगर हिटलर ने इंग्लिश चैनल पार कर लिया होता तो तुम (ब्रिटेनवासी) आज हिटलर के गुलाम होते।'

कैप्टन अब्बास अली भारत के महान स्वतन्त्रता सेनानी थे। उनके निधन पर हम सब उन्हें नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। सादर।।

Keywords खोजशब्द :- Captain Abbas Ali Died, INA Captain Abbas Ali, Indian Freedom Fighters, Netaji Subhash Chandra Bose, कैप्टन अब्बास अली का निधन, आजाद हिन्द फौज, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस 


चित्र साभार :- गूगल 
भारत सरकार ने मोबाइल टॉवर व हैंडसेट से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए संयुक्त पहल शुरू कर दी है। इस अध्ययन के लिए आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी मद्रास, आईआईटी रुड़की, जेएनयू तथा एम्स जैसे कई प्रमुख संस्थानों के प्रस्ताव की एक सूची बनाई गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन के जवाब में कहा है कि - 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत विज्ञान एवं आभियान्त्रिकी अनुसन्धान बोर्ड तथा दूरसंचार विभाग ने मोबाइल टॉवर व हैंडसेट से निकलने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन के संभावित असर पर अध्ययन के लिए पहल शुरू की है।' 

Keywords खोजशब्द :- Electromagnetic Field Radiation, Government of INDIA, Mobile Tower and Handset, Radiation Effects, Research, रेडिएशन, भारत सरकार

केन्द्र सरकार विज्ञान एवं गणित में शोध को बढ़ावा देने के लिए सर्व शिक्षा अभियान की तर्ज पर देश भर में 'राष्ट्रीय आविष्कार अभियान' शुरू करने की योजना बना रही है। इसके तहत स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों में विज्ञान एवं गणित में शोधकार्य को बढ़ावा देने के ठोस कदम उठाये जाएंगे। मानव विकास संसाधन मंत्रालय ने इस सिलसिले में केन्द्रीय विश्वविद्यालय, आईआईटी और सभी केन्द्रीय शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थानों से कहा है कि वे इस अभियान में हिस्सा ले। 


Keywords खोजशब्द :- National Invention Campaign for Science and Mathmatics, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान

हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्माता - निर्देशक देव आनंद जी का आज 91 वां जन्म दिवस है। देव साहब का जन्म 26 सितम्बर, 1923 ई. को पंजाब के गुरुदासपुर (ये स्थान अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। देव साहब पूरा नाम धर्म देव पिशोरीमल आनंद था। 
सन् 1946 ई. में इन्होंने फिल्म "हम एक है" से अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत करी थी, लेकिन इन्हें असली पहचान सन् 1948 में प्रदर्शित फिल्म "जिद्दी" से मिली थी। इसके ठीक एक वर्ष बाद यानि सन् 1949 में इन्होंने अपने बड़े भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर अपने फ़िल्मी बैनर "नवकेतन बैनर" की स्थापना की थी। देव आनंद का विवाह सन् 1954 में अभिनेत्री कल्पना कार्तिक के साथ हुई थी। देव साहब ने भारतीय सिनेमा को एक से बढकर एक बढ़िया फ़िल्में दी है, उनमें प्रमुख है :- CID, टैक्सी ड्राइवर, मुंशी जी, काला पानी, काला बाज़ार, हम दोनों, तेरे घर के सामने, तीन देवियाँ, गाइड, ज्वेल थीफ़, प्रेम पुजारी, जानी मेरा नाम, हरे रामा - हरे कृष्णा, गैम्बलर, हीरा - पन्ना, जोशीला, बनारसी बाबू, देस - परदेस, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर आदि उनकी यादगार फिल्में है। देव साहब ने अपने पूरे फ़िल्मी जीवन में 114 फिल्मों में काम किया, जिनमें से 104 फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। 
भारत सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2001 में "पदम् भूषण" तथा 2002 में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान "दादा साहेब फाल्के" पुरस्कार से नवाज़ा गया था। देव साहब 1946-2011 तक फिल्मों में स्थायी रूप से सक्रिय रहे, उनकी आखिरी फिल्म 2011 में प्रदर्शित "चार्जशीट" थी। 3 दिसम्बर, 2011 को लन्दन (इंग्लैंड) में दिल का दौरा पड़ने से 88 वर्ष की आयु देव आनंद का निधन हो गया था। 


आज देव साहब के 91 वें जन्म दिवस के अवसर पर हम सब उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते है। सादर … अभिनन्दन।। 

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 
आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस था।  यह दिवस भारत के महान शिक्षावादी, राजनीतिज्ञ और भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति रहे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। आज़ाद भारत के निर्माण में उनका बहुत अतुलनीय योगदान है। आज हम सब उनके 126 वें जन्मदिवस पर उन्हें नमन करते हुए हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते है। सादर।। 

कहते है माता - पिता के बाद अगर किसी का स्थान है तो वो है गुरु अर्थात शिक्षक का। लेकिन आज हम कहीं ना कही अपने प्राचीन काल के शिक्षकों और उनकी शिक्षाओं को भूल रहे है। संसार में सभी (कुछ को छोड़कर) लोग भगवान, ईश्वर, अल्लाह और गॉड की पूजा करते है, उन्हें ही वो अपना माता - पिता (अपना संरक्षक) और गुरु (मार्गदर्शक) मानते है। 


अगर बात करे प्राचीन हिन्दू पौराणिक कथाओं की तो ऋषि मुनि तथा आचार्य आदि सब मनुष्य के गुरु ही माने जाते थे। गुरु का कार्य होता है अपने शिष्य को सही राह दिखाना जिससे वो अपने जीवन के मार्ग को सृदृढ़ कर सके। और वाकई प्राचीनकाल के ऋषि मुनि और आचार्य ऐसा ही कार्य करते थे। इसीलिए वो आज भी गुरु के रूप में पूजे जाते है। 

भगवान परशुराम भगवान विष्णु के अवतार थे। भगवान परशुराम का विवरण रामायण में भी मिलता है और महाभारतकाल में भी। जबकि रामायणकाल से 1000 या 1500 वर्ष बाद महाभारत का भीषण युद्ध हुआ था।



भगवान रामचन्द्र 
इसी तरह भगवान रामचन्द्र भी रघुकुल में जन्में एक प्रतापी राजा थे वो भी भगवान विष्णु के अवतार थे।  अगर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से देखे तो भगवान राम भारत में आज से लगभग 7000 वर्ष पूर्व अयोध्या नगरी में राज करते थे। कई इतिहासकार भगवान राम को भाषा, साहित्य और दर्शन (फिलोसफी) का जन्मदाता मानते हैं। इस प्रकार भगवान राम अपने राजकाल में प्रजा के लिए राजा के साथ साथ एक गुरु की भूमिका का भी निर्वाह कर रहे थे।   
भगवान परशुराम 
लेकिन भगवान परशुराम को गुरु (शिक्षक ) के रूप में इतना सम्मान आने वाली पीढ़ियों ने नहीं दिया, जितना उनके शिष्य द्रोणाचार्य को दिया गया।  भगवान परशुराम के दो परम शिष्य माने जाते है जिनका विवरण महाभारत में भी है, वे है - देवव्रत (भीष्म पितामह) और द्रोणाचार्य। 

देवव्रत के पिता कुरु वंश के प्रतापी राजा शान्तनु तथा माता माँ गंगा थी। देवव्रत प्रतापी योद्धा था। देवव्रत को स्वयं भगवान परशुराम ने धनुष, गदायुद्ध, मलयुद्ध तथा राजनीति, धर्म आदि का ज्ञान दिया था। अपने पिता महाराज शान्तनु का विवाह सत्यवती से कराने के लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का कठोर व्रत अपना लिया था। उनकी इस भीष्म प्रतिज्ञा से प्रसन्न होकर उनके पिता ने उन्हें भीष्म नाम दिया तथा इच्छामृत्यु का वरदान दिया था। जैसा कि महाभारत में वर्णित है कि भीष्म महापराक्रमी योद्धा था उसने अकेले ही ना जाने कितने वीर योद्धाओं को पराजित किया था और ना जाने कितने ही राज्यों पर विजय प्राप्त करके आर्यावर्त (प्राचीनकाल में भारत का नाम) में सम्मिलित किया था। 


द्रोणाचार्य ऋषि भारद्वाज के पुत्र थे। द्रोणाचार्य ने भी देवव्रत (भीष्म पितामह) की तरह ही भगवान परशुराम राम से शिक्षा - दीक्षा ग्रहण की थी। महाभारत में जैसा वर्णित है गुरु द्रोण को भीष्म पितामह ने ही अपने पोतों (कौरव और पाण्डव) को शिक्षा देने के लिए गुरु के रूप में नियुक्त किया था। गुरु द्रोणाचार्य कौरवों और पाण्डवों को शिक्षा देते थे, जिनमें उनके सबसे प्रिय शिष्य गाण्डीवधारी अर्जुन थे। गुरु द्रोण ने कौरवों और पाण्डवों को समान रूप से शिक्षा दी थी। लेकिन पाण्डवों के लिए उनकी शिक्षा वास्तव में गुरुवाणी बन गई जबकि कौरवों ने गुरु द्रोण की दी हुई शिक्षाओं का सही रूप से कभी उपयोग नहीं किया। इसीलिए कौरवों का सम्पूर्ण जीवन अधर्म करते हुए नष्ट हुआ जबकि पाण्डवों ने उनकी दी हुई शिक्षा से आर्यावर्त में दोबारा धर्म की स्थापना की। 


गुरु द्रोण को आने वाली पीढ़ियों ने इतना सम्मान दिया की, भारत के सर्वोच्च गुरु पुरस्कार का नाम उन्हीं के सम्मान में "द्रोणाचार्य पुरस्कार" रखा गया है। 

अगर वास्तविक रूप से देखा जाये तो शिक्षा देना शिक्षक का कार्य अथवा धर्म होता है, चाहे उसके शिष्य कैसे भी हो लेकिन शिक्षक अपने हर शिष्य को अपने पुत्र की तरह सीखाता है, भले ही वो शिष्य इस शिक्षा का प्रयोग धर्म के लिए करे या अधर्म के लिए इसके लिए उत्तरदायी केवल शिष्य ही होता है। गुरु का कार्य होता है शिक्षा देना और शिष्य का कार्य होता है उस शिक्षा को ग्रहण करके अपने जीवन में उसका सही रूप से प्रयोग करना। सादर … अभिनन्दन।।


भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 15 अगस्त, 2014 ई. को लालकिले की प्राचीर से किए गये अपने दूसरे ऐलान "प्रधानमंत्री जन - धन योजना" का शुभारम्भ 28 अगस्त, 2014 ई. कर दिया गया है। "प्रधानमंत्री जन - धन योजना" के शुभारम्भ के अवसर पर देश भर में बैंकों द्वारा बड़ी संख्या में शिविरों का आयोजन किया गया है। 

"प्रधानमंत्री जन - धन योजना" का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, इस योजना अंतर्गत नया बैंक खाता खोलने पर एक लाख  का दुर्घटना बीमा (₹ 1 Lakh Accident Insurance) और एक डेबिट कार्ड (Debit Card) दिया जाएगा। "प्रधानमंत्री जन - धन योजना" के तहत ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी बैंकों के अधिकारियों को ई-मेल कर ज्यादा से ज्यादा लोगों का बैंक खाता खोलने के निर्देश दिए हैं।

प्रधानमंत्री जन - धन योजना की विशेषताएँ 

  • पैसों की सुरक्षा के साथ ब्याज (Interest)
  • डेबिट कार्ड (Debit Card)  के जरिये किसी भी एटीएम (ATM) से पैसे निकालना (Withdraw Money)
  • 1 लाख का दुर्घटना बीमा (₹ 1 Lakh Accident Insurance)
  • कोई न्यूनतम शेष राशि की आवश्यकता नहीं (No Minimum Balance Required)


प्रधानमंत्री जन - धन योजना की अन्य सुविधाएँ 

  • भारत में कहीं भी आसानी से पैसे भेजना (Easily Money Transfer anywhere in India)
  • यदि आप हितग्राही हैं तो सरकारी योजनाओं की राशि खातें में सीधे पाना 
  • 6 माह तक खाते के संतोषजनक परिचालन के बाद ओवरड्राफ्ट (Overdraft) की सुविधा 
  • पेंशन, बीमा, इत्यादि (Pension, Insurance, etc.)


प्रधानमंत्री जन - धन योजना के बारे में अधिक जानकारी के लॉगऑन करें :- http://pmjdy.gov.in/Default-hindi.aspx


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इबोला वायरस (Ebola Virus)
इबोला वायरस (Ebola Virus) एक संक्रमित और जानलेवा बीमारी है। इसमें तेज़ बुखार आता है। भीतरी रक्तस्त्राव होता है। यह रोग बदन के संक्रमित तरल पदार्थों के सम्पर्क में आने से होता है। किसी संक्रमित व्यक्ति या पशु से इस रोग का संचरण वायरस के रक्त अथवा शरीर के तरल पदार्थ से सम्पर्क के कारण हो सकता है। इस रोग में मौत की आशंका 90 % प्रतिशत तक होती है। इबोला वायरस का प्रभाव इंसानी शरीर में 2 से 21 दिन में दिख सकता है। इबोला वायरस की पहचान पहली बार सन 1976 ई॰ में कांगो देश में हुई थी। 1976 में ही कांगो की इबोला नदी के नाम पर इस खतरनाक वायरस को इबोला कहकर सम्बोधित किया गया गया था।
Fruit Bat (फ्रूट बैट)
इबोला वायरस का सबसे खतरनाक संवाहक फ्रूट बैट (Fruit Bat) (फल खाने वाला चमगादड़) है। इबोला वायरस के सम्पर्क से खुद अप्रभावित करते हुये ये चमगादड़ दूसरों को इस वायरस से संक्रमित कर सकता है। इस जीव के अलावा भी गोरिल्ला, चिंपाजी, बन्दर, चिकारा और साही भी इबोला वायरस के प्रमुख संवाहक है।

वर्ष 1976 से लेकर अब तक इबोला वायरस के 2000 से अधिक मामले सामने आ चुके है, जिनमें से लगभग 1200 लोगों की मौत हो चुकी है इस वायरस से संक्रमित होने के कारण। इबोला वायरस का सबसे ज्यादा कहर पश्चिम अफ्रीका में पड़ा है। वहाँ के गिनी, सियारा लियोन, लाइबेरिया, नाइजीरिया, रिपब्लिक ऑफ कांगो तथा डी आर कांगो आदि देशों में इबोला वायरस का सबसे ज्यादा प्रभाव है। इबोला वायरस एक लाइलाज बीमारी है, जिसका न ईलाज है न ही इसकी कोई रोकथाम है। लेकिन शुरुआत में इस वायरस का पता चल जाए तो कुछ हद तक इस बीमारी को रोका जा सकता है।

इबोला वायरस की ये महामारी इतनी खतरनाक है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पश्चिमी अफ्रीकी देशों मे फैली इस बीमारी को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपदा घोषित कर दिया है।

इबोला वायरस के प्रमुख लक्षण 

  • अचानक तबीयत खराब हो जाना
  • शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करना 
  • मांसपेशियों तथा सिर में दर्द 
  • उल्टी होना तथा दस्त लगना (डायरिया)
  • किडनी और लीवर का कमजोर होना 
  • शरीर में आंतरिक और बाहरी रक्तस्त्राव होना 


इबोला वायरस से बचाव 

  • संक्रमित व्यक्ति के रक्त, पसीने, मल आदि के सीधे सम्पर्क में आने से बचे 
  • फिलहाल इबोला वायरस की कोई दवा नहीं है, इसीलिए जितना हो सके सतर्कता बरते

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समुद्री जीव विज्ञानियों ने गुजरात में एक दुर्लभ जेलीफिश झील खोज निकाली है, जो शायद भारत की पहली ऐसी झील है। वन्यजीव वैज्ञानिक बीसी चौधरी ने बताया कि - 'संभवत: भारत मे पाई गई यह पहली जेलीफिश झील है। इस झील में इनकी संख्या भी बहुत ज्यादा है।' 

बीसी चौधरी के नेतृत्व में वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इण्डिया (Wildlife Trust of India) के शोधकर्ताओं की टीम ने गुजरात के आर्मबाड़ा का दौरा किया था। यहाँ उन्हें जेलीफिश के प्राकृतिक घर का पता चला। दो शोधकर्ताओं ने पानी के भीतर काम करने वाले उपकरणों व कैमरों के साथ जब 5-6 हेक्टेयर में फैली झील के तल का मुआयना किया, तो पाया की झील की तलहटी में 'अपसाइड डाउन जेलीफिश' की पूरी परत बिछी पड़ी है। इस झील की एक और खास बात पता चली कि ये जेलीफिश पूरे साल यहाँ मौजूद रहती हैं, जबकि अन्य स्थानों पर ऐसा नहीं होता है।


Keywords खोजशब्द :- Biology, India's First Jellyfish Lake, जेलीफिश, जीव विज्ञान    


ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने 16 प्रकाश वर्ष दूर पृथ्वी से मिलते - जुलते ग्रह का पता लगाया है। खबरों के मुताबिक, शोधकर्ताओं के एक अन्तर्राष्ट्रीय दल ने महापृथ्वी ग्रह GJ 832 c का पता लगाया है। यह लाल रंग के छोटे तारे की परिक्रमा करता है। ऐसा करने में यह ग्रह 16 वर्ष का समय लगाता है। यह उसी तरह से तारकीय ऊर्जा ग्रहण (Stellar Energy Eclipse) करता है, जैसे हमारी पृथ्वी करती है। इस ग्रह का तापमान पृथ्वी के समान है।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू साउथवेल्स स्कूल ऑफ़ फिजिक्स (University of New South Wales School of Physics) के डॉ. रॉबर्ट विटेनमायेर के नेतृत्व में शोध दल ने इस नए ग्रह की खोज की। उनकी इस उपलब्धि को एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (Astrophysical Journal) में प्रकाशित किया गया है।


Keywords खोजशब्द :- Astronomy, Australian Astronomers Team Discovered Earth like Planet GJ 832 c, Super Earth Planet GJ 832 c, खगोल विज्ञान, खोज, पृथ्वी जैसा ग्रह, जीजे 832 सी, ब्रह्मांड विज्ञान


विज्ञान (Science) का शाब्दिक अर्थ - वस्तु का व्यवस्थित ज्ञान है। विज्ञान शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द Skientia से हुई है , जिसका अर्थ है - ज्ञान या जानना। अत: कह सकते है कि विज्ञान नैसर्गिक घटनाओं और उनके सम्बन्धों विषय में परीक्षण तथा पर्यवेक्षण से प्राप्त श्रृंखलाबद्ध ज्ञान (Systematized knowledge) है। इससे यह स्पष्ट होता कि प्रकृति में पाई जाने वाली वस्तुओं एवं इनमें होने वाली अनेक घटनाओं का अध्ययन या ज्ञान प्राप्त करना ही विज्ञान है।

विज्ञान को दो प्रमुख शाखाओं (Branches) में विभाजित किया जा सकता है -

(1) सजीवों का विज्ञान (Science of living) - विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत सजीवों तथा उनमें होने वाली क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। इसे जीव विज्ञान (Biological Science or Biology) कहते हैं।

(2) निर्जीवों का विज्ञान (Science of non-living) - इसके अन्तर्गत उन पदार्थों व क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है जिनका सीधा सम्बन्ध जीवन से नहीं होता। इस शाखा को हम प्राय: भौतिक विज्ञान (Physical Science or Physics) कहते हैं।


Keywords खोजशब्द :- Branches of Science, Definition of Science, Science, विज्ञान, विज्ञान की शाखाएँ 


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जे. आर. डी. टाटा 
महान उद्योगपति श्री जे. आर. डी. टाटा जी का पूरा नाम जहाँगीर  रतन जी दादाभाई टाटा है। उनका जन्म 29 जुलाई, 1904 ई. को पेरिस में हुआ था। इनके पिता रतन जी दादाभाई टाटा पेरिस में निर्यात का कारोबार करते थे। इनकी माँ सुजैन फ्रांसीसी थी। जहाँगीर की स्कूली शिक्षा बम्बई के कैथेड्रल स्कूल में हुई। वह अपनी छुट्टियाँ पेरिस में माता - पिता के साथ बिताते थे। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने दो वर्ष जापान के याकोहामा में बिताए थे। स्कूली शिक्षा समाप्त करने के बाद जहाँगीर अपने माता - पिता के पास फ्रांस लौट गए। फ्रांस में उन्हें अनिवार्य फौजी सेवा के लिए फ़ौज में भर्ती कर लिया गया। 1924 उन्होंने  फ्रांसीसी घुड़सवार रेजीमेंट के साथ अल्जीरिया में बिताया।

उन्हीं दिनों जहाँगीर के पिता श्री रतन जी अपने पुत्र को उच्च शिक्षा के लिए कैम्ब्रिज भेजने की सोच रहे थे, किंतु उन्होंने उसे टाटा इस्पात कारखाने के महाप्रबन्धक जॉन पीटरसन का सहायक बनाने का फैसला किया।

श्री जे. आर. डी. टाटा को सन् 1926 में अपने पिता रतन जी दादाभाई टाटा जी की मृत्यु के बाद टाटा एण्ड सन्स में निदेशक बनाया गया। इससे पहले जे. आर. डी. टाटा ने 15 वर्ष की उम्र में विमान चालक बनने का फैसला किया था। सन् 1929 ई. में कमर्शियल लाइसेंस पाने वाले वह पहले भारतीय पायलट थे। तीस के दशक में उन्होंने टाटा एयरलाइन्स ( TATA Airlines ) शुरू की। अक्टूबर 1932 में एक इंजन वाले पाइपर विमान से उन्होंने करांची और बम्बई बीच पहली व्यापारिक उड़ान भरी। इसी विमान सेवा ने कालान्तर एयर इंडिया ( Air India ) का रूप ले लिया है।

टाटा उद्योग समूह के प्रमुख सर नौरोजी सकालटवाला के निधन के बाद सन् 1932 में जे. आर. डी. टाटा को टाटा उद्योग समूह ( TATA Industtrial Group ) का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने चार दशक से भी अधिक समय तक टाटा समूह नेतृत्व किया और फिर अपेक्षाकृत युवा रतन टाटा ( Ratan Tata ) को नेतृत्व सौंप दिया।

जे. आर. डी. टाटा के नेतृत्व में टाटा उद्योग समूह ने रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, ट्यूब, वोल्टाज , टाटा सर्विसेज, निर्यात, टाटा इंड्रस्टीज लिमिटेड आदि अनेक कंपनियाँ शुरू की। इसके अलावा उन्होंने मलेशिया और सिंगापुर में भी कंपनियाँ स्थापित कीं।

जे. आर. डी. टाटा जी को अनेकानेक उपलब्धियाँ प्राप्त रही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में वह सन् 1948 में भारत के प्रतिनिधि के रूप में थे। सन् 1974 में उन्हें IAF द्वारा सम्मानित एयर वाइस मार्शल घोषित किया गया। सन् 1954 में फ्रांस ने उन्हें अपने देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार "लीजन ऑफ़ द ऑनर" से नवाजा। भारत सरकार ने उन्हें सन् 1957 में देश का दूसरा सर्वोच्च पुरस्कार "पद्म विभूषण" से सम्मानित किया। इसके अलावा जे. आर. डी. टाटा जी को दुर्गाप्रसाद खेतान स्मारक स्वर्णपदक - 1970, अगस्त पुरस्कार - 1978 तथा टॉनीजेन्स पुरस्कार - 1979, रैंक ऑफ़ कमांडर ऑफ़ लीजन ऑफ़ ऑनर - 1983

भारत के तीन सुप्रसिद्ध विश्वविद्यालयों द्वारा उन्हें अपनी मानद उपाधियों से विभूषित किया गया -

D.Sc - इलाहबाद विश्वविद्यालय, उ. प्र. - 1947
D.Sc - बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, उ. प्र. - 1947
L.L.D. - बम्बई विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र - 1981

सन्  1992 ई. को जे. आर. डी. टाटा जी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" से विभूषित किया गया।

जे. आर. डी. टाटा जी का 89 वर्ष की आयु में 29 नवम्बर, 1993 में जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में निधन हो गया। उनकी मृत्यु पर भारतीय संसद ने अपनी कार्यवाही स्थगित थी। यह एक ऐसा सम्मान है जो आमतौर पर सांसदों को ही प्राप्त होता है। मरणोपरांत जे. आर. डी. टाटा जी को उनकी जन्मभूमि पेरिस में ही दफनाया गया।


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विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस ( World Nature Conservation Day ) प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को मनाया जाता है। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण से विलुप्त होते हुए जीव - जन्तुओं तथा पेड़ - पौधों का संरक्षण करना है।

पर्यावरण के समस्त जीवों का अपना भौतिक और रासायनिक अस्तित्व होता है। वे स्वयं नियन्त्रित एवं स्वचालित होते हुए भी अपने चारों ओर के पर्यावरण पर निर्भर करते हैं। जीवों के चारों ओर उपस्थित समस्त कारक जो उन्हें प्रभावित करते हैं, वही प्रकृति या वातावरण की रचना करते हैं।

मनुष्य जन्म से ही प्रकृति के सम्पर्क में आ जाता है। पृथ्वी की प्रकृति की सुरक्षा में संसाधनों के संरक्षण की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रकृति के विभिन्न घटकों --- जल, वायु, मिट्टी, ऊर्जा, वनस्पति, खनिज, जीव - जन्तुओं आदि के संरक्षण से पृथ्वी के प्राकृतिक सौन्दर्य में सन्तुलन स्थापित किया जा सकता है।

इसीलिए ये आवश्यक हो गया है कि हम अपनी पृथ्वी की प्रकृति की सुरक्षा करे तथा उनका संरक्षण करें। सादर।।


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जी हाँ,,, ये सच है !! गूगल एडसेंस के विज्ञापन अब जल्द ही हिन्दी चिट्ठाकारों के ब्लॉग्स और चिट्ठों पर भी नज़र आएँगे। हिन्दी के वरिष्ठ ब्लॉगर तथा हम सबके आदरणीय श्री रवि रतलामी जी ने अपने एक पोस्ट के माध्यम से हिन्दी ब्लॉग गूगल + कार्यकलाप के बारे में जानकारी दी थी। इसमें हिन्दी चिट्ठों के लिए गूगल एडसेंस के बारे में भी जानकारी दी गई थी। 

कल मुझे फेसबुक पर वरिष्ठ ब्लॉगर श्री खुशदीप सहगल जी ने भी इसी विषय पर एक मैसेज भेजा जो इस प्रकार था :-

प्रिय मित्र,

आपको जानकर अति प्रसन्नता होगी कि गूगल हिंदी के कुछ प्रतिष्ठित ब्लॉगर्स को अपने साथ जोड़ना चाह रहा है...इसमें गूगल एडसेंस जैसे लाभ हिंदी के लिए भी दिए जाने की योजना है...अगर आप इसके लिए इच्छुक हैं तो नीचे एक फॉर्म का लिंक भेज रहा हूँ 


इसे इस तरह भर सकते हैं-

आपका नाम- खुशदीप सहगल 
समूह में उत्सुकता रखने वाले का नाम…अपना नाम भरें 
अपना ई-मेल पता...  
फ़ोन नंबर या मोबाइल नंबर...

( नाम आप हिंदी या अंग्रेज़ी में किसी में भी लिख सकते हैं, ईमेल एड्रेस स्वाभाविक तौर पर अंग्रेज़ी में ही भरा जाएगा )

सादर, 
खुशदीप सहगल (xxxxx19075)


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राहुल देव बर्मन ( पंचम दा )
हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार राहुल देव बर्मन का जन्म 27 जून, 1939 ई. कोलकाता ( पश्चिम बंगाल ) में हुआ था। राहुल देव बर्मन के पिता सचिन देव बर्मन ( एस. डी. बर्मन ) भी हिन्दी फिल्मों के जाने - माने संगीतकार थे। राहुल देव बर्मन जी को आर. डी. बर्मन , पंचम और पंचम दा के नाम से भी जाना जाता है। राहुल देव बर्मन जी को फिल्म जगत में पंचम नाम से पुकारा जाता था। राहुल देव बर्मन जी बचपन में गुनगुनाते थे, तब वे "प" शब्द का बहुत उपयोग करते थे। यह बात अभिनेता अशोक कुमार के ध्यान में आई। क्योंकि सा रे गा मा पा में "प" का स्थान पाँचवाँ है इसलिए अशोक कुमार जी ने राहुल देव बर्मन जी को "पंचम" नाम से पुकारना शुरू कर दिया। तभी से उनका ये नाम प्रसिद्ध हो गया। 

पंचम दा ने भूत बंगला ( 1965 ) और प्यार का मौसम ( 1969 ) फिल्म में अभिनय भी किया था। पंचम दा ने कई प्रसिद्ध फिल्मों में अपना संगीत दिया था, जिसमें कुछ प्रमुख फ़िल्में हैं :- "तीसरी मंज़िल, "पड़ोसन", "यादों की बारात", "सीता और गीता", "हरे रामा हरे कृष्णा", "शोले", "शान", "आँधी", "किनारा", "परिचय", "इजाजत", "लिबास", "1942 ए लव स्टोरी" आदि है। पंचम दा ने 300 से भी ज्यादा फिल्मों में अपना अमर संगीत दिया था। पंचम दा हिन्दी फिल्मों के पहले प्रयोगवादी संगीतकार भी थे। पंचम दा को फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का पुरस्कार तीन बार प्राप्त हुआ था :- 1983, 1984 और 1995। 

4 जनवरी, 1994 ई. को संगीत का महासाधक हमेशा हमेशा के इस दुनिया से चला गया। "1942 ए लव स्टोरी" फिल्म पंचम दा के निधन के बाद प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म के गाने और संगीत को काफी प्रसिद्धि मिली। अपनी अंतिम फिल्म में यादगार संगीत देकर उन्होंने साबित किया कि संगीत जगत को देने के लिए अभी उनके पास काफी संगीत है लेकिन वक़्त ने संगीत के इस सच्चे साधक को हमेशा हमेशा के लिए हमसे दूर कर दिया।


आज राहुल देव बर्मन यानि पंचम दा के 75वें जन्मदिवस पर हम सब उन्हें और उनके संगीत को याद करते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते है। सादर।। 

तस्वीरों में हम सबके प्यारे "पंचम दा" 

अपने पिता सचिन देव बर्मन के साथ पंचम दा 

पंचम दा अपनी पत्नी और गायिका आशा भोसले के साथ 

पंचम दा के साथ संगीतबद्ध करते हुए किशोर कुमार 

पंचम दा और मोहम्मद रफ़ी 

पिता - पुत्र : सचिन देव बर्मन और राहुल देव बर्मन 

युवा राहुल देव बर्मन अपने पिता सचिन देव बर्मन के साथ 

अपने पिता के संगीतकार समूह में सरोद बजाते हुए पंचम दा 

पंचम दा, देव आनंद और किशोर कुमार 

पंचम दा, देव आनंद और पिता सचिन देव बर्मन 

आशा भोसले, किशोर कुमार और पंचम दा 

फिल्म "भूत बंगला" के एक दृश्य में - पंचम दा और महमूद 

पंचम दा और गीतकार जावेद अख्तर 

पंचम दा के संगीत को सुनते हुए सुपरस्टार राजेश खन्ना 

पंचम दा और राजेश खन्ना 

पंचम दा और अमिताभ बच्चन 

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